आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 MCQs Set-2 [हिंदी माध्यम]
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 MCQs Set-2 [हिंदी माध्यम]
28 min read
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955
THE ESSENTIAL COMMODITIES ACT, 1955
SET-2
Download Essential Commodities Act MCQs Set-2 PDF
1. धारा 7(1) के अंतर्गत दंड का प्रावधान कब लागू होता है?
a. जब धारा 4 का उल्लंघन हो
b. जब धारा 5 का उल्लंघन हो
c. जब धारा 3 के अधीन किए गए आदेश का उल्लंघन हो
d. जब केवल अधिहरण हो
2. धारा 3 की उपधारा (2) के खण्ड (ज) या (झ) से संबंधित आदेश के उल्लंघन पर अधिकतम कारावास कितना हो सकता है?
a. तीन मास
b. छह मास
c. एक वर्ष
d. सात वर्ष
3. धारा 7(1)(क)(ii) के अंतर्गत अन्य आदेशों के उल्लंघन पर न्यूनतम कारावास कितना है?
a. एक वर्ष
b. छह मास
c. तीन मास
d. कोई न्यूनतम सीमा नहीं
4. धारा 7(1)(क)(ii) के अंतर्गत अधिकतम कारावास की अवधि क्या है?
a. पाँच वर्ष
b. सात वर्ष
c. दस वर्ष
d. आजीवन कारावास
5. न्यायालय न्यूनतम अवधि से कम कारावास कब दे सकता है?
a. जब अभियुक्त पहली बार दोषी हो
b. जब जुर्माना दे दिया जाए
c. जब पर्याप्त और विशेष कारण निर्णय में अंकित किए जाएँ
d. जब अभियोजन सहमत हो
6. धारा 7(1)(ख) के अनुसार उल्लंघन से संबंधित सम्पत्ति का क्या होगा?
a. स्वामी को लौटा दी जाएगी
b. नीलाम कर दी जाएगी
c. सरकार के पक्ष में समपहृत कर ली जाएगी
d. न्यायालय के पास सुरक्षित रखी जाएगी
7. धारा 7(1)(ग) के अंतर्गत कौन-सी वस्तुएँ न्यायालय के आदेश से समपहृत की जा सकती हैं?
a. केवल आवश्यक वस्तु
b. केवल वाहन
c. पैकेज, पात्र, पशु, गाड़ी, जलयान या अन्य प्रवहण
d. केवल गोदाम
8. धारा 7(2) किस स्थिति में लागू होती है?
a. जब आदेश का उल्लंघन हो
b. जब धारा 3(4)(ख) के अधीन दिए गए निदेश का अनुपालन न किया जाए
c. जब अपील न की जाए
d. जब अधिहरण हो
9. धारा 7(2) के अंतर्गत न्यूनतम और अधिकतम कारावास की अवधि क्या है?
a. तीन मास से पाँच वर्ष
b. छह मास से सात वर्ष
c. तीन मास से सात वर्ष
d. एक वर्ष से सात वर्ष
10. पुनः दोषसिद्धि की दशा में (धारा 7(2क)) न्यूनतम कारावास कितना है?
a. तीन मास
b. छह मास
c. एक वर्ष
d. दो वर्ष
11. द्वितीय एवं प्रत्येक पश्चात्वर्ती अपराध पर अधिकतम कारावास कितना हो सकता है?
a. पाँच वर्ष
b. सात वर्ष
c. दस वर्ष
d. आजीवन
12. धारा 7(2ख) के अनुसार न्यूनतम से कम कारावास देने का पर्याप्त कारण क्या माना जाएगा?
a. अभियुक्त का गरीब होना
b. जनसाधारण या किसी व्यक्ति को कोई खास हानि न होना
c. जुर्माना भर देना
d. अभियोजन का कमजोर होना
13. धारा 7(3) के अनुसार पुनः दोषसिद्धि की दशा में न्यायालय क्या अतिरिक्त आदेश दे सकता है?
a. लाइसेंस रद्द करने का
b. जुर्माना माफ करने का
c. आवश्यक वस्तु के कारोबार पर प्रतिबंध लगाने का
d. केवल चेतावनी देने का
14. धारा 7(3) के अनुसार कारोबार पर प्रतिबंध की न्यूनतम अवधि क्या है?
a. तीन मास
b. छह मास
c. एक वर्ष
d. न्यायालय के विवेक पर
15. केन्द्रीय सरकार को कुछ रकमों को भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूल करने की शक्ति, किस धारा में परिभाषित हैं?
a. धारा 7(क)
b. धारा 7(ख)
c. धारा 7(ग)
d. धारा 7(2ख)
16. धारा 7क किस विषय से संबंधित है?
a. अपराधों की शास्ति से
b. अधिहरण की प्रक्रिया से
c. सरकार द्वारा कुछ रकमों की वसूली की शक्ति से
d. अपील की प्रक्रिया से
17. धारा 7क(1) के अनुसार कौन-सा व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत दायी हो सकता है?
a. जो अधिहरण आदेश के विरुद्ध अपील करता है
b. जो धारा 3 के अधीन आदेश के अनुसरण में देय रकम का भुगतान नहीं करता
c. जो केवल जमाखोरी करता है
d. जो न्यायालय में दोषमुक्त हो जाता है
18. धारा 7क(1)(ख) के अंतर्गत किस प्रकार की राशि शामिल है?
a. जुर्माने की राशि
b. न्यायालय द्वारा निर्धारित क्षतिपूर्ति
c. खाते या निधि में जमा की जाने वाली राशि
d. अपील शुल्क
19. यदि देय राशि के भुगतान या जमा में व्यतिक्रम किया जाता है तो वह राशि किस रूप में वसूल की जाएगी?
a. जुर्माने के रूप में
b. दीवानी डिक्री के रूप में
c. भू-राजस्व की बकाया या लोक मांग के रूप में
d. न्यायालय के आदेश से
20. धारा 7क(1) के अनुसार वसूल की जाने वाली राशि पर ब्याज की दर क्या है?
a. प्रतिवर्ष 6 प्रतिशत
b. प्रतिवर्ष 9 प्रतिशत
c. प्रतिवर्ष 12 प्रतिशत
d. प्रतिवर्ष 15 प्रतिशत
21. धारा 7क(1) के अंतर्गत ब्याज की गणना किस प्रकार की जाएगी?
a. चक्रवृद्धि ब्याज
b. साधारण ब्याज
c. दंडात्मक ब्याज
d. न्यायालय द्वारा निर्धारित ब्याज
22. ब्याज की गणना किस अवधि के लिए की जाएगी?
a. आदेश की तारीख से
b. अपराध की तारीख से
c. व्यतिक्रम की तारीख से वसूली की तारीख तक
d. अभियोजन की तारीख से
23. धारा 7क(1) के अंतर्गत वसूली का प्रावधान किन आदेशों पर लागू होता है?
a. केवल 1984 के बाद किए गए आदेशों पर
b. केवल 1984 से पूर्व किए गए आदेशों पर
c. 1984 के पूर्व और पश्चात् दोनों किए गए आदेशों पर
d. केवल राज्य सरकार के आदेशों पर
24. धारा 7क(2) के अनुसार वसूल की गई राशि का उपयोग कैसे किया जाएगा?
a. समेकित निधि में जमा किया जाएगा
b. न्यायालय के निर्देशानुसार
c. उसी आदेश के अनुसार जिसके अधीन राशि देय थी
d. राज्य सरकार के विवेक से
25. धारा 7क(3) के अनुसार न्यायालय क्या नहीं कर सकता?
a. आदेश को अवैध घोषित करना
b. वसूली पर स्थगन या निषेधाज्ञा देना
c. ब्याज की दर तय करना
d. अपील सुनना
26. धारा 7क(3) के अनुसार किस प्रकार का आदेश न्यायालय द्वारा नहीं दिया जा सकता?
a. दंडादेश
b. प्रतिदाय का आदेश
c. भू-राजस्व की बकाया के रूप में वसूली रोकने का आदेश
d. दोषमुक्ति का आदेश
27. यदि धारा 7क(1) के अधीन की गई वसूली का आधार आदेश अविधिमान्य घोषित हो जाए तो क्या होगा?
a. राशि जब्त रहेगी
b. कोई प्रतिदाय नहीं होगा
c. सरकार को राशि ब्याज सहित वापस करनी होगी
d. केवल मूल राशि लौटाई जाएगी
28. प्रतिदाय की स्थिति में ब्याज की दर क्या होगी?
a. प्रतिवर्ष 6 प्रतिशत
b. प्रतिवर्ष 9 प्रतिशत
c. प्रतिवर्ष 12 प्रतिशत
d. प्रतिवर्ष 15 प्रतिशत
29. प्रतिदाय पर ब्याज किस अवधि के लिए दिया जाएगा?
a. आदेश की तारीख से
b. वसूली की तारीख से प्रतिदाय की तारीख तक
c. अभियोजन की तारीख से
d. अपील की तारीख से
30. धारा 7क के स्पष्टीकरण के अनुसार “सरकार” से क्या अभिप्रेत है?
a. केवल राज्य सरकार
b. केवल केन्द्रीय सरकार
c. वह सरकार जिसने धारा 3 के अधीन आदेश किया
d. जिला प्रशासन
31. धारा 8 किस विषय से संबंधित है?
a. अपराध की अपील से
b. दंड के निर्धारण से
c. प्रयत्न और दुष्प्रेरण से
d. अधिहरण की प्रक्रिया से
32. धारा 8 के अनुसार किसे धारा 3 के आदेश का उल्लंघन करने वाला माना जाएगा?
a. केवल वास्तविक उल्लंघन करने वाले को
b. केवल आदेश जारी करने वाले अधिकारी को
c. उल्लंघन का प्रयत्न करने या दुष्प्रेरण करने वाले को
d. केवल अपराध में सहायता करने वाले को
33. यदि कोई व्यक्ति धारा 3 के अधीन आदेश का उल्लंघन करने का केवल प्रयत्न करता है, तो उसकी स्थिति क्या होगी?
a. उसे चेतावनी दी जाएगी
b. उसे उल्लंघनकर्ता नहीं माना जाएगा
c. उसे उसी प्रकार उल्लंघनकर्ता माना जाएगा जैसे वास्तविक उल्लंघन करने वाले को
d. केवल जुर्माना लगाया जाएगा
34. धारा 8 में “दुष्प्रेरण” का क्या प्रभाव है?
a. दुष्प्रेरण दंडनीय नहीं है
b. दुष्प्रेरण केवल सहायक अपराध है
c. दुष्प्रेरण को स्वयं उल्लंघन के समान माना गया है
d. दुष्प्रेरण पर अलग से दंड का प्रावधान है
35. धारा 8 के अनुसार प्रयत्न या दुष्प्रेरण करने वाले व्यक्ति को किस धारा के अंतर्गत दंडित किया जाएगा?
a. धारा 4
b. धारा 5
c. धारा 7
d. धारा 6क
36. धारा 8 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a. अपील के अधिकार को सीमित करना
b. अधिहरण की प्रक्रिया को सरल बनाना
c. वास्तविक उल्लंघन के साथ प्रयत्न और दुष्प्रेरण को भी दंडनीय बनाना
d. न्यायालयों की अधिकारिता समाप्त करना
37. यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य को धारा 3 के आदेश के उल्लंघन के लिए उकसाता है, परंतु उल्लंघन वास्तव में नहीं होता, तो क्या होगा?
a. कोई अपराध नहीं माना जाएगा
b. केवल उकसाने वाले पर जुर्माना लगेगा
c. उकसाने वाला उल्लंघनकर्ता माना जाएगा
d. केवल वास्तविक उल्लंघन पर ही दंड होगा
38. धारा 8 के अंतर्गत प्रयत्न और दुष्प्रेरण को उल्लंघन मानने का आधार क्या है?
a. न्यायालय का विवेक
b. सरकार का आदेश
c. विधिक उपधारणा
d. अभियोजन की सहमति
39. धारा 8 के अंतर्गत दोषसिद्धि के लिए क्या आवश्यक है?
a. वास्तविक उल्लंघन का पूर्ण होना
b. केवल नुकसान का होना
c. प्रयत्न या दुष्प्रेरण का होना
d. न्यायालय की पूर्व अनुमति
40. धारा 8 का प्रभाव किस प्रकार का है?
a. अपवादात्मक
b. प्रक्रियात्मक
c. दंडात्मक और विस्तारात्मक
d. केवल घोषणात्मक
41. मिथ्या कथन, किस धारा से सम्बंधित हैं?
a. धारा 9
b. धारा 10
c. धारा 12
d. धारा 14
42. धारा 9 किस प्रकार के अपराध से संबंधित है?
a. आदेश के उल्लंघन से
b. झूठे कथन या मिथ्या जानकारी देने से
c. अधिहरण से
d. अपील से
43. धारा 9 के अंतर्गत कौन-सा कथन दंडनीय है?
a. प्रत्येक गलत कथन
b. ऐसा कथन जो केवल अनुमान पर आधारित हो
c. ऐसा कथन जो सारवान् विशिष्टि में मिथ्या हो
d. केवल मौखिक कथन
44. धारा 9(i) के अनुसार मिथ्या कथन कब दंडनीय होगा?
a. जब कथन गलती से किया गया हो
b. जब कथन मिथ्या हो और उसके मिथ्या होने का ज्ञान या युक्तियुक्त विश्वास हो
c. जब कथन अधूरा हो
d. जब कथन न्यायालय में दिया गया हो
45. धारा 9 के अंतर्गत कौन-सी मानसिक अवस्था आवश्यक है?
a. केवल लापरवाही
b. केवल असावधानी
c. ज्ञान, युक्तियुक्त विश्वास या सत्य पर विश्वास का अभाव
d. केवल हानि का होना
46. धारा 9(ii) के अंतर्गत निम्न में से कौन-सा शामिल है?
a. केवल मौखिक बयान
b. न्यायालय में दिया गया साक्ष्य
c. पुस्तक, लेखा-अभिलेख, घोषणा, विवरणी या अन्य दस्तावेज में किया गया मिथ्या कथन
d. निजी पत्राचार
47. धारा 9 के अंतर्गत मिथ्या कथन किस आदेश के संदर्भ में किया गया होना चाहिए?
a. धारा 4 के आदेश के अंतर्गत
b. धारा 5 के आदेश के अंतर्गत
c. धारा 3 के अधीन किए गए आदेश के अंतर्गत
d. किसी भी सरकारी आदेश के अंतर्गत
48. यदि कोई व्यक्ति ऐसे दस्तावेज में झूठी जानकारी देता है जिसे रखने या देने के लिए वह बाध्य है, तो वह किस धारा के अंतर्गत दंडनीय होगा?
a. धारा 7
b. धारा 8
c. धारा 9
d. धारा 6क
49. धारा 9 के अंतर्गत अधिकतम कारावास की अवधि क्या है?
a. तीन वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों
b. पाँच वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों
c. सात वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों
d. दस वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों
50. यदि कोई व्यक्ति ऐसे कथन को सही नहीं मानता लेकिन फिर भी उसे प्रस्तुत करता है, तो उसकी आपराधिक स्थिति क्या होगी?
a. वह दोषमुक्त होगा
b. केवल दीवानी दायित्व बनेगा
c. वह धारा 9 के अंतर्गत दंडनीय होगा
d. केवल जुर्माना लगेगा
51. धारा 9 के अंतर्गत “सारवान् विशिष्टि” का क्या अभिप्राय है?
a. छोटी तकनीकी त्रुटि
b. ऐसा तथ्य जो निर्णय या आदेश को प्रभावित कर सकता है
c. केवल वित्तीय विवरण
d. केवल मौखिक जानकारी
52. कम्पनियों द्वारा उपराध, किस धारा से सम्बंधित हैं?
a. धारा 9
b. धारा 10
c. धारा 12
d. धारा 14
53. धारा 10 किस स्थिति में लागू होती है?
a. जब कोई व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से अपराध करता है
b. जब कम्पनी द्वारा धारा 3 के आदेश का उल्लंघन किया जाता है
c. जब सरकारी विभाग अपराध करता है
d. जब केवल निदेशक अपराध करता है
54. यदि धारा 3 के आदेश का उल्लंघन कम्पनी द्वारा किया गया हो, तो किसे दोषी माना जाएगा?
a. केवल कम्पनी को
b. केवल निदेशक को
c. कम्पनी तथा वह प्रत्येक व्यक्ति जो उल्लंघन के समय कम्पनी के कारोबार का भारसाधक और उत्तरदायी था
d. केवल प्रबंधक को
55. धारा 10(1) के अंतर्गत कौन-सा व्यक्ति दण्ड से बच सकता है?
a. जो कम्पनी का कर्मचारी हो
b. जो यह साबित कर दे कि उल्लंघन उसकी जानकारी के बिना हुआ या उसने सम्यक् तत्परता बरती
c. जो केवल नाममात्र का अधिकारी हो
d. जो जुर्माना भर दे
56. धारा 10(1) के अंतर्गत “भारसाधक और उत्तरदायी” व्यक्ति से क्या अभिप्राय है?
a. केवल शेयरधारक
b. केवल लेखाकार
c. वह व्यक्ति जो कम्पनी के कारोबार के संचालन के लिए उत्तरदायी हो
d. कोई भी कर्मचारी
57. धारा 10(2) के अनुसार निदेशक, प्रबंधक या अधिकारी कब दोषी माना जाएगा?
a. जब वह कम्पनी का कर्मचारी हो
b. जब अपराध उसकी सम्मति, मौनानुकूलता या उपेक्षा से हुआ हो
c. जब वह कम्पनी छोड़ चुका हो
d. जब उसने केवल आदेश जारी किया हो
58. धारा 10(2) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a. केवल कम्पनी को दंडित करना
b. वरिष्ठ अधिकारियों को स्वतः दोषमुक्त करना
c. अपराध में सम्मिलित या लापरवाही करने वाले अधिकारियों को उत्तरदायी ठहराना
d. अपील की व्यवस्था करना
59. धारा 10 के स्पष्टीकरण के अनुसार “कम्पनी” में क्या शामिल है?
a. केवल पंजीकृत कम्पनी
b. केवल सरकारी निगम
c. कोई निगमित निकाय तथा फर्म या व्यक्तियों का अन्य संगम
d. केवल निजी कम्पनी
60. धारा 10 के स्पष्टीकरण के अनुसार फर्म के मामले में “निदेशक” कौन माना जाएगा?
a. प्रबंधक
b. लेखाकार
c. भागीदार
d. कर्मचारी
61. धारा 10(1) के अंतर्गत दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध क्या किया जा सकता है?
a. केवल विभागीय कार्यवाही
b. केवल जुर्माना
c. उनके विरुद्ध अभियोजन चलाया जा सकता है और दंडित किया जा सकता है
d. केवल लाइसेंस रद्द किया जा सकता है
62. धारा 10 में “मौनानुकूलता” (connivance) का क्या अर्थ है?
a. स्पष्ट लिखित आदेश
b. अपराध की जानकारी होते हुए भी मौन स्वीकृति
c. अनजाने में हुई गलती
d. केवल प्रशासनिक त्रुटि
63. धारा 10 के अंतर्गत कम्पनी के अपराधों के लिए उत्तरदायित्व का स्वरूप कैसा है?
a. केवल व्यक्तिगत
b. केवल सामूहिक
c. कम्पनी और संबंधित अधिकारियों दोनों का संयुक्त उत्तरदायित्व
d. केवल दीवानी उत्तरदायित्व
64. धारा 10क का मुख्य विषय क्या है?
a. अपराधों की शास्ति
b. अपराधों का संज्ञेय और जमानतीय होना
c. अपील की प्रक्रिया
d. कंपनियों की जिम्मेदारी
65. धारा 10क के अनुसार इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय प्रत्येक अपराध की प्रकृति क्या होगी?
a. केवल जमानतीय
b. केवल अजमानतीय
c. संज्ञेय
d. असंज्ञेय
66. धारा 10क में दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) के संबंध में क्या उपबंध किया गया है?
a. दण्ड प्रक्रिया संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) पूर्णतः लागू नहीं होगी
b. दण्ड प्रक्रिया संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) के प्रतिकूल होते हुए भी अपराध संज्ञेय होगा
c. दण्ड प्रक्रिया संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) के अनुसार ही अपराध असंज्ञेय होगा
d. दण्ड प्रक्रिया संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) लागू नहीं होगी
67. धारा 10क के अनुसार पुलिस अधिकारी किस स्थिति में बिना वारंट गिरफ्तार कर सकता है?
a. केवल न्यायालय की अनुमति से
b. केवल शिकायत पर
c. जब इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किया गया हो
d. केवल मजिस्ट्रेट के आदेश से
68. धारा 10क के अंतर्गत अपराध को संज्ञेय घोषित करने का कानूनी प्रभाव क्या है?
a. पुलिस बिना प्राथमिकी के जांच नहीं कर सकती
b. पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है
c. केवल समन जारी किया जा सकता है
d. केवल दीवानी कार्यवाही होगी
69. न्यायालय को अधिनियम के अधीन सिद्धदोष कम्पनियों के नाम, कारबार के स्थान आदि प्रकाशित करने की शक्ति, किस धारा में परिभाषित हैं?
a. धारा 10(ख)
b. धारा 10(क)
c. धारा 10(ग)
d. धारा 10(घ)
70. धारा 10ख के अनुसार न्यायालय को किस स्थिति में कम्पनी का नाम प्रकाशित करने की शक्ति प्राप्त होती है?
a. जब कम्पनी पर अभियोग चल रहा हो
b. जब कम्पनी जमानत पर हो
c. जब कम्पनी इस अधिनियम के अधीन सिद्धदोष ठहराई गई हो
d. जब कम्पनी को नोटिस दिया गया हो
71. धारा 10ख(1) के अंतर्गत प्रकाशित की जाने वाली जानकारी में कौन-कौन सी बातें सम्मिलित हो सकती हैं?
a. केवल कम्पनी का नाम
b. केवल उल्लंघन का स्वरूप
c. कम्पनी का नाम, कारबार का स्थान, उल्लंघन का स्वरूप तथा अन्य समुचित विशिष्टियां
d. केवल निदेशकों के नाम
72. धारा 10ख के अनुसार कम्पनी से संबंधित प्रकाशन का खर्च किसके द्वारा वहन किया जाएगा?
a. राज्य सरकार द्वारा
b. केन्द्रीय सरकार द्वारा
c. न्यायालय द्वारा
d. स्वयं कम्पनी द्वारा
73. धारा 10ख(1) के अंतर्गत प्रकाशन किस माध्यम से कराया जा सकता है?
a. केवल सरकारी राजपत्र में
b. केवल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में
c. न्यायालय द्वारा निर्देशित समाचारपत्रों में या अन्य रीति से
d. केवल न्यायालय की वेबसाइट पर
74. धारा 10ख(2) के अनुसार प्रकाशन कब तक नहीं किया जाएगा?
a. जब तक अभियोजन लंबित है
b. जब तक जांच पूर्ण नहीं हो जाती
c. जब तक अपील की अवधि बिना अपील समाप्त न हो जाए या अपील का निपटारा न हो जाए
d. जब तक जुर्माना अदा न कर दिया जाए
75. धारा 10ख(3) के अनुसार प्रकाशन का खर्च किस प्रकार वसूल किया जाएगा?
a. भू-राजस्व की तरह
b. लोक मांग के रूप में
c. न्यायालय द्वारा अधिरोपित जुर्माने के समान
d. दीवानी डिक्री के रूप में
76. धारा 10ख में प्रयुक्त “न्यायालय मामले की परिस्थितियों में समुचित समझे” का क्या तात्पर्य है?
a. न्यायालय बाध्य है केवल सीमित जानकारी प्रकाशित करने के लिए
b. न्यायालय को विवेकाधीन शक्ति प्राप्त है
c. न्यायालय केवल सरकार के निर्देश पर कार्य करेगा
d. न्यायालय प्रकाशन से इंकार नहीं कर सकता
77. धारा 10ख के स्पष्टीकरण के अनुसार “कम्पनी” शब्द का अर्थ किस धारा से लिया जाएगा?
a. धारा 3 के स्पष्टीकरण खंड (क) से
b. धारा 6 के स्पष्टीकरण खंड (क) से
c. धारा 7 के स्पष्टीकरण खंड (क) से
d. धारा 10 के स्पष्टीकरण खंड (क) से
78. धारा 10ख का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a. कम्पनी को दंड से मुक्त करना
b. कम्पनी को अपील का अधिकार देना
c. जनसाधारण को कम्पनी के अपराध की जानकारी देना
d. केवल आर्थिक दंड लगाना
79. धारा 10ख के अंतर्गत प्रकाशन का आदेश कौन दे सकता है?
a. केवल राज्य सरकार
b. केवल केन्द्रीय सरकार
c. वह न्यायालय जिसने कम्पनी को सिद्धदोष ठहराया है
d. अपीलीय न्यायालय
80. आपराधिक मनःस्थिति की उपधारणा, किस धारा में परिभाषित हैं?
a. धारा 10(ख)
b. धारा 10(क)
c. धारा 10(ग)
d. धारा 10(घ)
81. धारा 10ग का मुख्य विषय क्या है?
a. अपराधों की शास्ति
b. आपराधिक मनःस्थिति की उपधारणा
c. अपील की प्रक्रिया
d. जमानत का प्रावधान
82. धारा 10ग(1) के अनुसार न्यायालय किस बात की उपधारणा करेगा?
a. अभियुक्त निर्दोष है
b. अभियुक्त दोषी है
c. अभियुक्त की आपराधिक मनःस्थिति विद्यमान है
d. अभियुक्त ने स्वीकारोक्ति की है
83. धारा 10ग के अंतर्गत आपराधिक मनःस्थिति की उपधारणा किस प्रकार के अपराधों में लागू होती है?
a. प्रत्येक अपराध में
b. केवल जमानतीय अपराधों में
c. केवल उन अपराधों में जिनमें आपराधिक मनःस्थिति अपेक्षित हो
d. केवल कंपनियों से संबंधित अपराधों में
84. धारा 10ग के अनुसार अभियुक्त के लिए क्या प्रतिवाद (defence) उपलब्ध है?
a. यह साबित करना कि अपराध नहीं हुआ
b. यह साबित करना कि आदेश अवैध था
c. यह साबित करना कि उसके पास आपराधिक मनःस्थिति नहीं थी
d. यह साबित करना कि वह लोक सेवक था
85. धारा 10ग के स्पष्टीकरण के अनुसार “आपराधिक मनःस्थिति” में क्या-क्या सम्मिलित है?
a. केवल आशय
b. केवल ज्ञान
c. आशय, मन्तव्य, किसी तथ्य की जानकारी तथा किसी तथ्य पर विश्वास या विश्वास करने का कारण
d. केवल लापरवाही
86. धारा 10ग(2) के अनुसार कोई तथ्य कब “साबित” माना जाएगा?
a. जब वह संभावनाओं से अधिक प्रतीत हो
b. जब वह प्रबल संदेह पर आधारित हो
c. जब न्यायालय को उसका विद्यमान होना युक्तियुक्त संदेह के परे प्रतीत हो
d. जब अभियुक्त उसे स्वीकार कर ले
87. धारा 10ग(2) के अनुसार निम्न में से कौन-सा मानदंड अस्वीकार्य है?
a. युक्तियुक्त संदेह के परे
b. न्यायालय का विश्वास
c. केवल अत्यधिक संभावनाओं पर आधारित सिद्धि
d. ठोस साक्ष्य पर आधारित निष्कर्ष
88. धारा 10ग में आपराधिक मनःस्थिति के संबंध में भार-ए-साक्ष्य किस पर होता है?
a. सदैव अभियोजन पर
b. सदैव अभियुक्त पर
c. प्रारंभिक रूप से न्यायालय की उपधारणा पर, प्रतिवाद सिद्ध करने का भार अभियुक्त पर
d. पुलिस अधिकारी पर
89. धारा 10ग का उद्देश्य मुख्यतः क्या है?
a. अभियुक्त को संरक्षण देना
b. आवश्यक वस्तुओं से संबंधित अपराधों में दोषसिद्धि को सरल बनाना
c. दंड की अवधि कम करना
d. केवल प्रक्रिया निर्धारित करना
90. धारा 11 का मुख्य विषय क्या है?
a. अपराधों की शास्ति
b. अपराधों का संज्ञान
c. अपील की प्रक्रिया
d. कंपनियों की जिम्मेदारी
91. धारा 11 के अनुसार न्यायालय कब किसी अपराध का संज्ञान ले सकता है?
a. जब पुलिस रिपोर्ट प्रस्तुत करे
b. जब मौखिक शिकायत की जाए
c. जब लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए
d. जब न्यायालय को स्वतः जानकारी हो
92. धारा 11 के अंतर्गत लिखित रिपोर्ट कौन कर सकता है?
a. कोई भी नागरिक
b. केवल पुलिस अधिकारी
c. भारतीय दण्ड संहिता की धारा 21 (भारतीय न्याय संहिता की धारा 2(28) के अंतर्गत लोक सेवक
d. केवल अभियुक्त
93. धारा 11 में लोक सेवक के अतिरिक्त किन्हें लिखित रिपोर्ट करने का अधिकार दिया गया है?
a. केवल न्यायालय को
b. केवल राज्य सरकार को
c. कोई व्यथित व्यक्ति या मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम
d. केवल पुलिस अधीक्षक को
94. धारा 11 के अनुसार क्या मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम का सदस्य होना आवश्यक है?
a. हाँ, अनिवार्य है
b. नहीं, सदस्य होना आवश्यक नहीं है
c. केवल अध्यक्ष के लिए आवश्यक है
d. केवल पंजीकृत सदस्यों के लिए
95. धारा 11 के अंतर्गत “व्यथित व्यक्ति” का क्या आशय है?
a. केवल लोक सेवक
b. केवल अभियुक्त
c. वह व्यक्ति जो अपराध से प्रभावित हो
d. केवल उपभोक्ता संगम
96. धारा 11 के स्पष्टीकरण के अनुसार “मान्यताप्राप्त उपभोक्ता संगम” से क्या अभिप्रेत है?
a. अनरजिस्टर्ड उपभोक्ता समूह
b. सरकारी उपभोक्ता परिषद
c. कम्पनी अधिनियम या अन्य विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत स्वैच्छिक उपभोक्ता संगम
d. केवल राज्य सरकार द्वारा गठित संगम
97. धारा 11 के अंतर्गत संज्ञान के लिए रिपोर्ट का स्वरूप कैसा होना चाहिए?
a. मौखिक
b. शपथपत्र
c. लिखित
d. टेलीफोनिक
98. धारा 12 का मुख्य विषय क्या है?
a. कारावास की अवधि
b. जुर्माने के बारे में विशेष उपबन्ध
c. अपील की प्रक्रिया
d. अपराधों का संज्ञान
99. धारा 12 के अनुसार यह प्रावधान किस कानून के होते हुए भी लागू होगा?
a. भारतीय दण्ड संहिता, 1860
b. भारतीय साक्ष्य अधिनियम
c. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 29 (भारतीय नागरिक सुरक्षा न्याय 2023 धारा 23)
d. सामान्य धाराएँ अधिनियम
100. धारा 12 के अंतर्गत जुर्माने का विशेष प्रावधान किस स्थिति में लागू होता है?
a. किसी भी अपराध के लिए
b. केवल कंपनियों के अपराध के लिए
c. धारा 3 के अधीन किए गए आदेश के उल्लंघन के लिए
d. केवल पुनरावृत्ति अपराध के लिए
101. धारा 12 के अनुसार किस सीमा से अधिक जुर्माना विधिसम्मत रूप से लगाया जा सकता है?
a. एक हजार रुपए
b. दो हजार रुपए
c. पांच हजार रुपए
d. दस हजार रुपए
102. धारा 12 के अनुसार कौन-सा न्यायालय पांच हजार रुपए से अधिक का जुर्माना लगा सकता है?
a. कोई भी मजिस्ट्रेट
b. केवल सत्र न्यायालय
c. राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से सशक्त प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट
d. केवल उच्च न्यायालय
103. धारा 12 के अंतर्गत प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के लिए क्या शर्त आवश्यक है?
a. केंद्र सरकार की अनुमति
b. उच्च न्यायालय की अनुमति
c. राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से सशक्त किया जाना
d. अभियोजन की सहमति
104. धारा 12 में “विधिसम्मत होगा” शब्दों का क्या अभिप्राय है?
a. यह केवल अनुशंसा है
b. यह अनिवार्य प्रावधान है
c. यह वैध और कानूनसम्मत अधिकार प्रदान करता है
d. यह न्यायालय के विवेक पर निर्भर नहीं करता
105. धारा 12 के अनुसार यदि मजिस्ट्रेट राज्य सरकार द्वारा सशक्त नहीं है तो वह क्या नहीं कर सकता?
a. दोषसिद्धि करना
b. कारावास का दण्ड देना
c. पांच हजार रुपए से अधिक का जुर्माना लगाना
d. अभियुक्त को तलब करना
106. धारा 12 किस प्रकार का प्रावधान है?
a. सामान्य प्रावधान
b. अपवादात्मक और विशेष प्रावधान
c. प्रक्रियात्मक प्रावधान
d. अपीलीय प्रावधान
107. संक्षेपतः विचारण की शक्ति, किस धारा में परिभाषित हैं?
a. धारा 12(क)
b. धारा 13(क)
c. धारा 14(क)
d. धारा 15(क)
108. धारा 12क(1) के अंतर्गत किसी आदेश के संक्षिप्त विचारण हेतु विशेष आदेश किसके द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाता है?
a. राज्य सरकार द्वारा
b. जिला मजिस्ट्रेट द्वारा
c. केन्द्रीय सरकार द्वारा
d. संसद द्वारा
109. धारा 12क(1) के अंतर्गत जारी अधिसूचना को जारी किए जाने के पश्चात् कहाँ रखा जाना आवश्यक है?
a. उच्च न्यायालय के समक्ष
b. राज्य विधानमंडल के समक्ष
c. संसद के दोनों सदनों के समक्ष
d. केवल लोकसभा के समक्ष
110. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 1971 के पश्चात् जारी अधिसूचना अधिकतम कितनी अवधि तक प्रवृत्त रह सकती है, यदि पहले विखंडित न की जाए?
a. एक वर्ष
b. दो वर्ष
c. तीन वर्ष
d. अनिश्चित काल तक
111. धारा 12क(2) के अनुसार किन अपराधों का संक्षेपतः विचारण किया जा सकता है?
a. सभी आवश्यक वस्तुओं से संबंधित अपराध
b. केवल विशेष आदेशों से संबंधित अपराध
c. धारा 3 के अंतर्गत खाद्य पदार्थ या औषधि से संबंधित आदेशों के उल्लंघन के अपराध
d. केवल राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अपराध
112. धारा 12क(2) के अंतर्गत संक्षेपतः विचारण कौन कर सकता है?
a. कोई भी न्यायिक मजिस्ट्रेट
b. केवल सत्र न्यायाधीश
c. राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से सशक्त प्रथम वर्ग का न्यायिक मजिस्ट्रेट या महानगर मजिस्ट्रेट
d. केवल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
113. धारा 12क के अंतर्गत संक्षेपतः विचारण में दोषसिद्धि की स्थिति में मजिस्ट्रेट अधिकतम कितनी अवधि का कारावास दे सकता है?
a. छह माह
b. एक वर्ष
c. दो वर्ष
d. तीन वर्ष
114. यदि मजिस्ट्रेट को यह प्रतीत हो कि एक वर्ष से अधिक का कारावास दिया जाना आवश्यक है, तो उसे क्या करना होगा?
a. तत्काल दोषमुक्त कर देना
b. मामला सत्र न्यायालय को भेज देना
c. संक्षेपतः विचारण छोड़कर नियमित विचारण की प्रक्रिया अपनाना
d. केवल जुर्माना लगाना
115. धारा 12क(3) के अनुसार संक्षेपतः विचारित मामले में अपील का अधिकार कब नहीं होगा?
a. जब केवल जुर्माना लगाया गया हो
b. जब एक माह से अधिक का कारावास दिया गया हो
c. जब एक माह से अनधिक कारावास और दो हजार रुपये से अनधिक जुर्माना दिया गया हो
d. प्रत्येक दोषसिद्धि के विरुद्ध
116. धारा 12क(3) के अनुसार अपील का अधिकार कब उपलब्ध होगा?
a. जब कोई भी दण्डादेश पारित किया गया हो
b. जब मजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित सीमाओं से अधिक दण्डादेश पारित किया गया हो
c. केवल संपत्ति के समपहरण के आदेश पर
d. केवल जुर्माने के मामलों में
117. धारा 12क(4) के अनुसार, यदि कोई मामला अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व लंबित है और किसी साक्षी की परीक्षा नहीं हुई है, तो उसका क्या होगा?
a. वह स्वतः समाप्त हो जाएगा
b. उसका नियमित विचारण किया जाएगा
c. उसका संक्षेपतः विचारण किया जाएगा
d. उसे उच्च न्यायालय भेजा जाएगा
118. यदि लंबित मामला ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष है जो संक्षेपतः विचारण के लिए सक्षम नहीं है, तो उस मामले के साथ क्या किया जाएगा?
a. मामला निरस्त कर दिया जाएगा
b. मामला सत्र न्यायालय को भेजा जाएगा
c. मामला सक्षम मजिस्ट्रेट को भेजा जाएगा
d. मामला राज्य सरकार को संदर्भित किया जाएगा
119. धारा 12ख का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a. लोक अधिकारियों को पूर्ण प्रतिरक्षा देना
b. सिविल न्यायालयों की शक्तियों का पूर्ण उन्मूलन करना
c. सिविल न्यायालयों द्वारा व्यादेशों आदि का दिया जाना
d. केवल केन्द्रीय सरकार को व्यादेश देने की शक्ति देना
120. धारा 12ख के अनुसार सिविल न्यायालय किसके विरुद्ध व्यादेश नहीं देगा?
a. किसी निजी व्यक्ति के विरुद्ध
b. केवल राज्य सरकार के विरुद्ध
c. केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार या लोक अधिकारी के विरुद्ध
d. केवल लोक सेवक के विरुद्ध
121. धारा 12ख किन कार्यों पर लागू होती है?
a. निजी क्षमता में किए गए कार्यों पर
b. पदीय हैसियत से किए गए या किए जाने तात्पर्यित कार्यों पर
c. न्यायिक कार्यों पर
d. संविदात्मक दायित्वों पर
122. धारा 12ख के अंतर्गत सिविल न्यायालय किस प्रकार का आदेश देने से प्रतिबंधित है?
a. केवल स्थायी व्यादेश
b. केवल अस्थायी व्यादेश
c. व्यादेश या किसी अन्य अनुतोष के लिए आदेश
d. केवल हर्जाने का आदेश
123. धारा 12ख के अनुसार सिविल न्यायालय व्यादेश या अन्य अनुतोष कब दे सकता है?
a. बिना किसी शर्त के
b. न्यायालय की अनुमति से
c. जब सरकार या अधिकारी को आवेदन की सूचना दे दी गई हो
d. केवल उच्च न्यायालय के निर्देश पर
124. धारा 12ख के अनुसार सूचना देना किसे आवश्यक है?
a. केवल न्यायालय को
b. केवल वादी को
c. संबंधित सरकार या लोक अधिकारी को
d. महाधिवक्ता को
125. धारा 12ख के अंतर्गत “अनुतोष” से क्या अभिप्राय है?
a. केवल कारावास
b. केवल जुर्माना
c. व्यादेश के अतिरिक्त कोई भी अन्य सिविल राहत
d. केवल अपील का अधिकार
126. धारा 12ख किन आदेशों के संबंध में लागू होती है?
a. केवल राज्य सरकार द्वारा बनाए गए आदेशों पर
b. केवल केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए आदेशों पर
c. इस अधिनियम के अधीन या तद्धीन बनाए गए किसी भी आदेश पर
d. केवल अधिसूचनाओं पर
127. आदेशों के बारे में उपधारणा, किस धारा से सम्बंधित हैं?
a. धारा 13
b. धारा 14
c. धारा 15
d. धारा 16
128. धारा 13 के अनुसार न्यायालय किस तथ्य के बारे में उपधारणा करेगा?
a. आदेश न्यायालय द्वारा पारित किया गया था
b. आदेश राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित था
c. आदेश सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया गया था
d. आदेश विधायी प्रकृति का था
129. धारा 13 के अंतर्गत उपधारणा कब लागू होती है?
a. जब आदेश मौखिक हो
b. जब आदेश किसी प्राधिकारी द्वारा किया गया और हस्ताक्षरित होना तात्पर्यित हो
c. जब आदेश केवल अधिसूचना हो
d. जब आदेश न्यायालय में सिद्ध किया गया हो
130. धारा 13 के अंतर्गत न्यायालय द्वारा की जाने वाली उपधारणा का स्वरूप क्या है?
a. निर्णायक उपधारणा
b. अपवादात्मक उपधारणा
c. प्रत्याभूत उपधारणा
d. खण्डनीय उपधारणा
131. धारा 13 के अनुसार न्यायालय किस बात को सिद्ध करने के लिए अतिरिक्त साक्ष्य की मांग नहीं करेगा?
a. आदेश की आवश्यकता
b. आदेश की विषय-वस्तु
c. आदेश का सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाना
d. आदेश का प्रभाव
132. यदि आदेश पर हस्ताक्षर होना तात्पर्यित है, तो धारा 13 के अनुसार न्यायालय क्या मानेगा?
a. आदेश अवैध है
b. आदेश किसी अन्य अधिकारी द्वारा किया गया है
c. आदेश उसी प्राधिकारी द्वारा किया गया था
d. आदेश केवल मसौदा है
133. धारा 13 के अंतर्गत की गई उपधारणा का खण्डन किसके द्वारा किया जा सकता है?
a. केवल न्यायालय द्वारा
b. केवल अभियोजन द्वारा
c. अभियुक्त या कोई भी संबंधित पक्ष द्वारा
d. केवल सरकार द्वारा
134. धारा 14 का मुख्य विषय क्या है?
a. अपराध की परिभाषा
b. अभियोजन की स्वीकृति
c. कतिपय मामलों में सबूत का भार
d. दण्ड की मात्रा
135. धारा 14 के अनुसार सबूत का भार किस पर होता है?
a. अभियोजन पक्ष पर
b. न्यायालय पर
c. अभियुक्त व्यक्ति पर
d. जाँच अधिकारी पर
136. धारा 14 कब लागू होती है?
a. जब किसी आदेश का उल्लंघन संदेहास्पद हो
b. जब धारा 3 के अधीन किए गए आदेश के उल्लंघन के लिए अभियोजन किया जाता है
c. जब कोई सिविल वाद दायर किया जाता है
d. जब अपील दायर की जाती है
137. धारा 14 के अनुसार अभियुक्त को क्या सिद्ध करना होता है?
a. कि आदेश अवैध था
b. कि अपराध करने का आशय नहीं था
c. कि उसके पास विधिपूर्ण प्राधिकार या अनुज्ञा-पत्र था
d. कि अभियोजन के साक्षी अविश्वसनीय हैं
138. धारा 14 के अंतर्गत किस प्रकार के आदेश के उल्लंघन पर सबूत का भार अभियुक्त पर डाला गया है?
a. जो आदेश दण्ड प्रक्रिया से संबंधित हो
b. जो आदेश केवल जुर्माने से संबंधित हो
c. जो आदेश बिना विधिपूर्ण प्राधिकार या अनुज्ञा-पत्र के कोई कार्य करने से या कब्जा रखने से प्रतिषिद्ध करता हो
d. जो आदेश केवल प्रशासनिक हो
139. धारा 14 सामान्य आपराधिक विधि के किस सिद्धांत से अपवाद उत्पन्न करती है?
a. संदेह का लाभ अभियुक्त को
b. दण्ड अपराध के अनुपात में
c. अभियोजन पर सबूत का भार
d. प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत
140. यदि अभियुक्त धारा 14 के अनुसार वैध प्राधिकार सिद्ध नहीं कर पाता है, तो इसका परिणाम क्या होगा?
a. अभियोजन स्वतः विफल हो जाएगा
b. अभियुक्त दोषसिद्धि के लिए उत्तरदायी होगा
c. मामला सिविल प्रकृति का हो जाएगा
d. न्यायालय पुनः जाँच का आदेश देगा
141. धारा 14 के अंतर्गत सबूत का भार किस तथ्य तक सीमित है?
a. अपराध के सभी तत्वों तक
b. आदेश के जारी होने तक
c. वैध प्राधिकार या अनुज्ञा-पत्र के अस्तित्व तक
d. दण्ड की मात्रा तक
142. धारा 15 का मुख्य विषय क्या है?
a. अपराधों की संख्या बढ़ाना
b. अधिनियम के अधीन की गई कार्रवाई के लिए परित्राण
c. सरकार की जवाबदेही बढ़ाना
d. सिविल न्यायालयों की शक्तियाँ समाप्त करना
143. धारा 15(1) के अनुसार किसके विरुद्ध वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती?
a. केवल सरकार के विरुद्ध
b. केवल लोक सेवक के विरुद्ध
c. किसी व्यक्ति के विरुद्ध, जिसने सद्भावपूर्वक आदेश के अनुसरण में कार्य किया हो
d. किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं
144. धारा 15(1) के अंतर्गत संरक्षण किस स्थिति में प्राप्त होता है?
a. जब कार्य जानबूझकर किया गया हो
b. जब कार्य न्यायालय के आदेश से किया गया हो
c. जब कार्य धारा 3 के अधीन आदेश के अनुसरण में सद्भावपूर्वक किया गया हो
d. जब कार्य से कोई नुकसान न हुआ हो
145. धारा 15(2) के अनुसार सरकार के विरुद्ध वाद कब नहीं हो सकेगा?
a. जब नुकसान हुआ हो
b. जब आदेश अवैध हो
c. जब नुकसान धारा 3 के अधीन आदेश के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई से हुआ हो
d. जब आदेश लिखित न हो
146. धारा 15(1) के अंतर्गत किस प्रकार की कार्यवाही से संरक्षण दिया गया है?
a. केवल सिविल वाद से
b. केवल अभियोजन से
c. वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही से
d. केवल अनुशासनात्मक कार्यवाही से
147. धारा 15 के अंतर्गत संरक्षण किन आदेशों से संबंधित है?
a. किसी भी प्रशासनिक आदेश से
b. न्यायालय द्वारा पारित आदेश से
c. धारा 3 के अधीन किए गए आदेश से
d. केवल अधिसूचनाओं से
148. यदि कोई कार्य सद्भावपूर्वक न होकर दुर्भावना से किया गया हो, तो धारा 15 का प्रभाव क्या होगा?
a. पूर्ण संरक्षण मिलेगा
b. आंशिक संरक्षण मिलेगा
c. कोई संरक्षण नहीं मिलेगा
d. केवल सरकार को संरक्षण मिलेगा
149. धारा 15 का प्रभाव मुख्यतः किस सिद्धांत को सुदृढ़ करता है?
a. दण्ड की निश्चितता
b. प्रशासनिक कार्यों की न्यायिक समीक्षा
c. सद्भावपूर्वक किए गए शासकीय कार्यों की सुरक्षा
d. आपराधिक उत्तरदायित्व का विस्तार
150. धारा 15क धारा में क्या परिभाषित हैं?
a. लोक सेवकों को पूर्ण प्रतिरक्षा देना
b. लोक सेवकों के अभियोजन हेतु पूर्व मंजूरी की व्यवस्था करना
c. न्यायालयों की शक्तियाँ सीमित करना
d. अभियोजन की प्रक्रिया समाप्त करना
151. धारा 15क के अनुसार न्यायालय किस स्थिति में अपराध का संज्ञान नहीं करेगा?
a. जब अपराध संदेहास्पद हो
b. जब अभियुक्त लोक सेवक हो
c. जब पूर्व मंजूरी प्राप्त न की गई हो
d. जब आदेश मौखिक हो
152. धारा 15क किन व्यक्तियों पर लागू होती है?
a. सभी अभियुक्तों पर
b. केवल निजी व्यक्तियों पर
c. लोक सेवकों पर
d. केवल ठेकेदारों पर
153. धारा 15क के अंतर्गत अभियोजन से पूर्व मंजूरी कब आवश्यक होती है?
a. जब अपराध किसी निजी कार्य में किया गया हो
b. जब अपराध न्यायालय के आदेश से किया गया हो
c. जब अपराध धारा 3 के अधीन आदेश के अनुसरण में कर्तव्य निर्वहन के दौरान किया गया हो
d. जब अपराध संज्ञेय न हो
154. यदि लोक सेवक संघ के कार्यकलापों के संबंध में नियोजित है या था, तो अभियोजन की पूर्व मंजूरी किससे ली जाएगी?
a. राज्य सरकार से
b. जिला मजिस्ट्रेट से
c. केन्द्रीय सरकार से
d. उच्च न्यायालय से
155. यदि लोक सेवक राज्य के कार्यकलापों के संबंध में नियोजित है या था, तो अभियोजन की पूर्व मंजूरी किससे आवश्यक है?
a. केन्द्रीय सरकार से
b. राज्य सरकार से
c. सत्र न्यायलय से
d. लोक सेवा आयोग से
156. धारा 15क का उद्देश्य मुख्यतः किस सिद्धांत को संतुलित करता है?
a. दण्ड की कठोरता और उदारता
b. लोक सेवकों की जवाबदेही और कर्तव्य निर्वहन की सुरक्षा
c. अभियोजन और बचाव के अधिकार
d. न्यायालय और कार्यपालिका की शक्तियाँ
157. धारा 16 का मुख्य विषय क्या है?
a. दण्ड का प्रावधान
b. अधिनियम का विस्तार
c. निरसन और व्यावृत्तियां
d. अपील का अधिकार
158. धारा 16(1) के अनुसार कौन-सा अध्यादेश एतद्द्वारा निरसित किया गया है?
a. आवश्यक वस्तु अध्यादेश, 1954
b. आवश्यक वस्तु अध्यादेश, 1955
c. आवश्यक वस्तु अध्यादेश, 1956
d. आवश्यक वस्तु अध्यादेश, 1961
159. धारा 16(1)(ख) के अंतर्गत कौन-सी राज्य विधियाँ निरसित की गई हैं?
a. सभी राज्य विधियाँ
b. केवल दण्डात्मक राज्य विधियाँ
c. वे राज्य विधियाँ जो आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, प्रदाय, वितरण, व्यापार या वाणिज्य को नियंत्रित करती हैं
d. केवल कर से संबंधित राज्य विधियाँ
160. धारा 16(2) के अनुसार, पूर्ववर्ती आदेश कब तक प्रवृत्त रहेगा?
a. अधिनियम के प्रारम्भ तक
b. छह माह तक
c. जब तक वह इस अधिनियम के अधीन किए गए नए आदेश द्वारा अतिष्ठित न कर दिया जाए
d. जब तक न्यायालय उसे रद्द न कर दे
161. धारा 16(2) के अंतर्गत कौन-सी बातें प्रवृत्त बनी रहती हैं?
a. केवल आदेश
b. केवल नियुक्तियाँ
c. आदेश, नियुक्तियाँ, अनुज्ञप्तियाँ, अनुज्ञा-पत्र तथा निदेश
d. केवल अनुज्ञा-पत्र
162. धारा 16(3) का प्रभाव किस अधिनियम की धारा 6 से संबंधित है?
a. भारतीय दण्ड संहिता, 1860
b. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
c. साधारण खण्ड अधिनियम, 1897
d. दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973
163. धारा 16(3) के अनुसार, साधारण खण्ड अधिनियम की धारा 6 कैसे लागू होगी?
a. केवल आंशिक रूप से
b. इस अधिनियम द्वारा अपवर्जित रूप से
c. निरसन पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना
d. केवल भविष्य की कार्रवाइयों पर
